सोमवार, 4 जनवरी 2021

लेखाशास्त्र कक्षा 12 -अध्याय 2 B, - साझेदारी लेखांकन - ,आधारभूत अवधारणाएँ

 लेखाशास्त्र कक्षा 12 -अध्याय 2 B, - साझेदारी लेखांकन - ,आधारभूत अवधारणाएँ 


नमस्कार, मैं रामावतार कुमावत आपका स्वागत करता हूँ। 



प्रश्न 1 - साझेदारों के मध्य संबंधों को प्रभावित करने वाले सभी मसले किसके अंतर्गत समाहित होते हैं?

उत्तर - साझेदारी विलेख में समाहित होते हैं। 


प्रश्न 2 - कुछ विशिष्ट मुद्दों पर विलेख में अभिव्यक्त नहीं होने पर कौनसे प्रावधान लागू होते हैं?

उत्तर - भारतीय साझेदारी अधिनियम १९३२ के प्रावधान लागू होते हैं। 


प्रश्न 3 - साझेदारी खातों को प्रभावित करने वाले प्रावधान कौन कौन से हैं?

उत्तर - 1. लाभ व हानि विभाजन अनुपात,

2. पूँजी पर ब्याज, 

3. आहरण पर ब्याज,

4. प्रवृद्ध राशि पर ब्याज,

5. फर्म के कार्यों हेतु परिश्रिमिक आदि हैं। 


प्रश्न 4 - यदि समझौता विलेख लाभ हानि अनुपात पर अस्पष्ट या मौन है तब फर्म के लाभ हानि का साझेदारों के मध्य किस अनुपात में विभाजित किया जाएगा?

उत्तर - बराबर अनुपात में विभाजित किया जायेगा। 


प्रश्न 5 - साझेदारों द्वारा फर्म में लगाई गयी पूँजी का अनुपात समान (बराबर) नहीं होते हुए भी लाभ व हानि का विभाजन  बराबर अनुपात में कब बांटा जाता है?

उत्तर - लाभ विभाजन अनुपात पर समझौते विलेख के अस्पष्ट या मौन होने पर सभी में बराबर विभाजन होगा। 


प्रश्न 6 - साझेदारों की पूँजी पर ब्याज कब नहीं दिया जाता है?

उत्तर - स्पष्ट विलेख के अभाव में साझेदारों की पूँजी पर ब्याज नहीं दिया जाता है। 


प्रश्न 7 - विलेख में स्पष्ट उल्लेख न होने पर साझेदारों के आहरण पर कितना ब्याज लिया जाता है?

उत्तर - कोई ब्याज नहीं लिया जाता है। 


प्रश्न 8 - किसी साझेदार द्वारा प्रवृद्ध राशि के रूप में लगाई गयी पूँजी पर कितना ब्याज दिया जा सकता है?

उत्तर - 6% वार्षिक दर पर दिया जा सकता है। 


प्रश्न 9 - कोई भी साझेदार फर्म के व्यवसाय को चलाने के लिए वेतन या पारश्रमिक पाने का हकदार कब हो सकता है?

उत्तर - विलेख में स्पष्ट उल्लेख होने पर ही पारश्रिमिक पाने का हकदार होता है। 


प्रश्न 10 - साझेदारी फर्म के लिए लेखांकन निष्पादन किस प्रकार होता है?

उत्तर - ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार एकल स्वामित्व के व्यवसाय वाली फर्मों में होता है। 


प्रश्न 11 - एकल स्वामित्व व साझेदारी फर्म के लेखांकन निष्पादन में अपवाद स्वरूप क्या अंतर होते है?

 उत्तर - 1. साझेदार के पूँजी खाते का अनुरक्षण,

2. साझेदारों के बीच लाभ व हानि का वितरण, 

3. पिछले लाभों के  गलत विनियोग के लिए समायोजन,

4. साझेदारी फर्म का पुनर्गठन तथा 

5. साझेदारी फर्म का विघटन आदि। 


प्रश्न 12 - साझेदार तथा फर्म से सम्बंधित सभी लेनदेन किस माध्यम से उनके खातों में अभिलेखित किया जाता है?

उत्तर - उनके पूँजी खातों के माध्यम से अभिलेखित किया जाता है। 


प्रश्न 13 - पूँजी के रूप में लगाई गयी धन राशि, 

पूँजी की निकासी, लाभ का भाग, पूँजी पर ब्याज, आहरण पर ब्याज, साझेदार का वेतन तथा कमीशन आदि को किन खातों में अभिलेखित किया जाता है?

उत्तर - साझेदारों के पूँजी खातों में अभिलेखित किया जाता है। 


प्रश्न 14 - साझेदारों के पूँजी खातों को किन दो विधियों में अनुरक्षित किया जा सकता है?

उत्तर - 1. स्थिर पूँजी विधि तथा 

2. अस्थिर पूँजी विधि है। 


प्रश्न 15 - स्थिर पूँजी खाता विधि तथा अस्थिर पूँजी खाता विधि में क्या अंतर है?

उत्तर - साझेदार के पूँजी खाते में प्रत्यक्ष रूप से पूँजी की निकासी अतिरिक्त या आहरण के रूप में लेखा बद्ध की गयी है अथवा नहीं, यही अंतर है। 


प्रश्न 16 - साझेदारी में प्रत्येक साझेदार के दो खाते कौनसी पूँजी विधि में होते हैं?

उत्तर - स्थिर पूँजी विधि में प्रत्येक साझेदार के दो खाते रखे जाते हैं। 


प्रश्न 17 - स्थिर पूँजी विधि में  साझेदार के दो खाते कौन कौनसे होते हैं?

उत्तर -. साझेदार का पूँजी खाता एवं 

2. साझेदार का चालू खाता होते हैं। 


प्रश्न 18 - साझेदार के कौन से खाता जमा शेष साल-दर- साल कौनसी पूँजी विधि में प्रदर्शित करते हैं?

उत्तर - स्थिर पूँजी विधि में हमेशा जमा शेष प्रदर्शित होते हैं। 


प्रश्न 19 - अतिरिक्त पूँजी लगाना या पूँजी के एक भाग को निकालना किस पूँजी विधि में संभव है?

उत्तर - स्थिर पूँजी विधि में , साझेदारों की सहमति के अनुसार ही संभव है। 


प्रश्न 20 - लाभ की भागीदारी, पूँजी पर ब्याज, आहरण आदि सभी लेन देन साझेदार के पूँजी खाते से अलग चालू खाते द्वारा कौनसी पूँजी विधि में किए जाते हैं?

उत्तर - स्थिर पूँजी विधि में किए जाते हैं। 


प्रश्न 21- नाम शेष को परिसम्पति की तरफ और जमा शेष को देनदारियों की ओर कौनसे खाते में प्रदर्शित किया जाता है?

उत्तर - साझेदार के चालूखाते के तुलन पत्र में प्रदर्शित किया जाता है। 


प्रश्न 22 - प्रत्येक साझेदार के लिए एक ही अर्थात मात्र पूँजी खाता कौनसी पूँजी विधि में रखा जाता है?

उत्तर - अस्थिर पूँजी विधि में साझेदार का एक ही खाता रखा जाता है। 


प्रश्न 23 - साझेदार के सभी समायोजन जैसे लाभ एवं हानि का भाग, पूँजी पर ब्याज, साझेदार का वेतन या कमीशन आदि साझेदार के पूँजी खाते में सीधे अभिलेखित किस पूँजी विधि में किए जाते हैं?

उत्तर - अस्थिर पूँजी विधि में अभिलेखित किए जाते हैं। 


प्रश्न 24 - साझेदार की पूँजी में घट बढ़ किस खाते में होती है?

उत्तर - अस्थिर पूँजी खाते में होती है। 


प्रश्न 25 - खातों की संख्या के आधार पर स्थिर पूँजी एवं अस्थिर पूँजी विधि में क्या अंतर है?

उत्तर - स्थिर पूँजी विधि में अंतर्गत प्रत्येक साझेदार के लिए दो खाते अलग अलग सुस्थापित किए जाते हैं अर्थात साझेदार का पूँजी खाता एवं साझेदार का चालू खाता होते हैं। जबकि अस्थिर पूँजी विधि में प्रत्येक साझेदार के लिए एक ही (पूँजी) खाता होता है। 


धन्यवाद!


बुधवार, 30 दिसंबर 2020

लेखाशास्त्र कक्षा १२ -अध्याय २A, - साझेदारी लेखांकन - ,आधारभूत अवधारणाएँ

 


लेखाशास्त्र कक्षा १२ -अध्याय २A, - साझेदारी लेखांकन - ,आधारभूत अवधारणाएँ 


नमस्कार, मैं रामावतार कुमावत आपका स्वागत करता हूँ। 


प्रश्न १ - व्यवसायी लोग किन परिस्थितियों में साझेदारी को अपनाकर संगठन की रचना करते हैं?

उत्तर - जब व्यवसाय विस्तारित होता है तब व्यवसाय की देखभाल तथा उसके जोखिमों को उठाने के लिए अधिक पूँजी तथा मानव संसाधनों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए व्यावसायी लोग साझेदारी की रचना करते हैं। 


प्रश्न २ - एक साझेदारी संस्था कब अस्तित्व में आती है?

उत्तर -जब कम से कम दो व्यक्ति एक साथ मिलकर व्यवसाय को आरम्भ करने के लिए सहमत होते हैं, तब। 


प्रश्न ३ - भारतीय साझेदारी अधिनियम १९३२ के अनुभाग ४ के अनुसार साझेदारी की परिभाषा क्या है?

उत्तर - "साझेदारी उन व्यक्तियों के बीच एक सम्बन्ध है जो एक ऐसे व्यवसाय के लाभ को बाँटने के लिए सहमत हैं जिसका संचालन उन सब के द्वारा या उनमें से किसी एक के द्वारा किया जाता है।"


प्रश्न ४- जब एक व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत रूप से साझेदारी में सम्मिलित होता है तो उसे क्या कहते हैं?

उत्तर - साझेदार कहते हैं। 


प्रश्न ५ - साझेदार एक साथ मिलकर क्या कहलाते हैं?

उत्तर - फर्म कहलाते हैं। 


प्रश्न ६ - जिस नाम के अंतर्गत साझेदारी व्यवसाय संचालित होता है उसे क्या कहते हैं?

उत्तर - फर्म का नाम कहते हैं। 


प्रश्न ७ - साझेदारी की अनिवार्य एवं महत्वपूर्ण विशिष्टाएँ क्या हैं?

उत्तर - १. दो या दो से अधिक व्यक्ति, 

२. अनुबंध या समझौता ,

३. व्यवसाय , 

४. पारस्परिक अभिकरण,

५. लाभ का विभाजन,

६. साझेदार के उत्तरदायित्व आदि साझेदारी की अनिवार्य एवं महत्वपूर्ण विशिष्टाएँ हैं। 


प्रश्न ८ - एक एकेला व्यक्ति साझेदार क्यों नहीं हो सकता है?

उत्तर - क्यों कि वह स्वयं के साथ अनुबंध या समझौता नहीं कर सकता है। 


प्रश्न ९ - जब दो या दो से अधिक व्यक्ति एक व्यवसाय स्थापित करने और उसके लाभों एवं हानियों की भागीदारी के लिए सहमत होते हैं तो वे क्या माने जाते हैं?

उत्तर - साझेदार या भागीदार माने जाते हैं। 


प्रश्न १० - साझेदारी गठन में कम से कम कितने व्यक्तियों को साथ आना चाहिए?

उत्तर - कम से कम दो व्यक्तियों को साथ आना चाहिए। 


प्रश्न ११ - एक फर्म के गठन में कम से कम कितने साझेदार हो सकते हैं?

उत्तर - कम से कम दो साझेदार हो सकते हैं। 


प्रश्न १२ - व्यवसाय चलाने व लाभ-हानि बांटने के लिए दो या दो से अधिक व्यक्तियों के मध्य साझेदारी किसका परिणाम होती है?

उत्तर - अनुबंध या समझौते का परिणाम होती है। 


प्रश्न १३ - व्यवसाय चलाने तथा आपसी संबंधो के लिए साझेदारी का आधार क्या होता है?

उत्तर - समझौता या अनुबंध साझेदारी का आधार होता है। 


प्रश्न १४ - साझेदारों के मध्य साझेदारी या भागीदारी किस आधार पर होती है?

उत्तर - अनुबंध (समझौते) के आधार पर करते हैं। 


प्रश्न १५ - साझेदारों के मध्य कौनसे अनुबंध वैध होते हैं?

उत्तर - लिखित व मौखिक दोनों ही अनुबंध वैध होते हैं। 


प्रश्न १६ - किसी तरह के विवाद से बचने के लिए साझेदारों के मध्य कौनसे अनुबंध को प्राथमिकता दी जाती है?

उत्तर - लिखित अनुबंध (समझौते) को प्राथमिकता दी जाती है। 


प्रश्न १७ - साझेदारों के मध्य समझौता (अनुबंध) क्यों किया जाता है?

उत्तर - एक वैध व्यवसाय को चलाने के लिए किया जाता है। 


प्रश्न १८ - साझेदारी के एक व्यवसाय को चलाने के लिए कौनसा सम्बन्ध अत्यंत महत्वपूर्ण होता है?

उत्तर - पारस्परिक अभिकरण का सम्बन्ध अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। 


प्रश्न १९ - साझेदारी या भागीदारी का महत्वपूर्ण तत्व क्या होता है?

उत्तर - फर्म के लाभों को आपस में बांटना होता है जो नकारात्मक भी हो सकता है। 


प्रश्न २० - फर्म के सभी कार्यों के लिए  संयुक्त रूप से तथा स्वतन्त्र रूप से दूसरे साझेदारों के साथ कौन उत्तरदायी होता है?

उत्तर - प्रत्येक साझेदार उत्तरदायी होता है। 


प्रश्न २१ - साझेदारों के बीच समझौते के परिणाम स्वरूप किसका जन्म होता है?

उत्तर - साझेदारी का जन्म होता है। 


प्रश्न २२ - साझेदारों के बीच समझौते के विवरण समाहित होने वाले अभिलेख को क्या कहते हैं?

उत्तर - साझेदारी विलेख कहते हैं। 


प्रश्न २३ - साझेदारी विलेख की शर्तों में बदलाव के लिए क्या आवश्यक है?

उत्तर - सभी साझेदारों की सहमति आवश्यक है। 


प्रश्न २४ - साझेदारों के बीच संबंधों को प्रभावित करने वाले पहलुओं की सूचना कहाँ समाहित की जाती है?

उत्तर - साझेदारी विलेख में समाहित की जाती है। 


प्रश्न २५ - स्टाम्प अधिनियम (स्टैंप एक्ट) के प्रावधान के अनुसार उचित प्रकार से प्रारूपित एवं तैयार क्या करना चाहिए?

उत्तर - साझेदारी विलेख को उचित प्रारूप में तैयार किया जाना चाहिए। 


प्रश्न २६ - रजिस्टार (पंजीयक) से पंजीकृत क्या कराया जाना चाहिए?

उत्तर - साझेदारी विलेख को पंजीकृत कराया जाना चाहिए?


प्रश्न २७ - साजेदारी विलेख में सामान्यतः कौन से विवरणों को शामिल किया जाता है?

उत्तर - १. फर्म का नाम, पता और मुख्य व्यवसाय,

२. सभी साझेदारों नाम व पते, 

३. प्रत्येक साझेदार द्वारा लगाई गयी पूँजी की राशि, 

४. फर्म की लेखांकन अवधि,

५. साझेदारी प्रारम्भ करने की तिथि,

६. बैंक खातों का संचालन,

७. लाभ व हानि के विभाजन का अनुपात,

८. पूँजी, ऋणों एवं आहरणों आदि पर ब्याज की दर,

९. अंकेक्षक की नियुक्ति का तरीका, यदि कोई हो,

१०. वेतन, कमीशन आदि, यदि किसी साझेदार को देय हो,

११. प्रत्येक साझेदार के अधिकार, कर्तव्य तथा उत्तरदायित्व,

१२. एक या अधिक साझेदारों के दिवालिएपन के कारण से पैदा होने वाली हानि का निष्पादन,

१३. फर्म के विघटन पर खातों का निपटारा, 

१४. साझेदारों के मध्य होने वाले आपसी विवादों का निपटान,

१५. एक साझेदार का प्रवेश, सेवानिवृति तथा मृत्यु की स्थिति में अनुपालित किए जाने वाले नियम तथा 

१६. व्यवसाय संचालन से सम्बंधित कोई भी अन्य मसला आदि का समावेश होता है। 


धन्यवाद!

रविवार, 27 दिसंबर 2020

लेखाशास्त्र कक्षा १२ - अलाभकारी संस्थाएं एवं साझेदारी खाते, अध्याय १ C


लेखाशास्त्र कक्षा १२, - अलाभकारी संस्थाएं एवं साझेदारी खाते, 
अध्याय १ (अलाभकारी संस्थानों के लिए लेखांकन) C ,अलाभकारी संस्थानों का अर्थ एवं परिभाषाएं  

नमस्कार, मैं रामावतार कुमावत आपका स्वागत करता हूँ। 

प्रश्न १ - अपनी वित्तीय स्थिति का निर्धारण करने के लिए अलाभकारी संस्थाएं क्या तैयार करती है?
उत्तर - तुलन पत्र तैयार करती है। 

प्रश्न २ - अलाभकारी संस्थाओं का तुलन पत्र किसके समान होता है?
उत्तर - लाभकारी (व्यापारिक) संस्थाओं के तुलन पत्र के समान ही होता है। 

प्रश्न ३ - अलाभकारी संस्थाओं का तुलन पत्र क्या दर्शाता है? 
उत्तर - वर्ष के अंत परिसम्पतियों और दायित्वों को दर्शाता है। 

प्रश्न ४ - अलाभकारी संस्थाओं के तुलन पत्र में परिसम्पतियों को किस पक्ष में दर्शाया जाता है?
उत्तर - दाँए पक्ष में दर्शाया  जाता है। 

प्रश्न ५ - तुलन पत्र में दायित्वों को किस पक्ष में दर्शाया जाता है?
उत्तर - बाएं पक्ष में दर्शाया जाता है। 

प्रश्न ६ - तुलन पत्र में अलाभकारी संस्थान  पूँजी के स्थान पर क्या लिखते हैं?
उत्तर - सामान्य निधि या पूँजी निधि लिखते हैं। 

प्रश्न ७ - वसीयत, प्रवेश शुल्क और आजीवन सदस्यता शुल्क को किस खाते में जोड़ा जाता है?
उत्तर - प्रत्यक्ष रूप से पूँजी खाते में जोड़ा जाता है। 

प्रश्न ८ - सदस्य द्वारा वार्षिक आधार पर भुगतान किए गए शुल्क को क्या कहा जाता है?
उत्तर - वार्षिक सदस्यता शुल्क कहते हैं। 

प्रश्न ९ - अलाभकारी संस्थाओं की आय का मुख्य स्रोत क्या होता है?
उत्तर - चंदा होता है। 

प्रश्न १० - सदस्यों द्वारा भुगतना किया गया चंदा, प्राप्ति एवं भुगतान खाते में किस रूप में दर्ज किया जाता है?
उत्तर - प्राप्ति के रूप में दर्ज किया जाता है। 

प्रश्न ११ - सदस्यों द्वारा भुगतान किया गया चंदा, आय और व्यय खाते में किस रूप में दर्शाया जाता है?
उत्तर - आय के रूप में दर्शाया जाता है। 

प्रश्न १२ - वर्ष के दौरान वास्तव में प्राप्त चंदे की कुल राशि को कौनसा खाता दर्शाता है?
उत्तर - प्राप्ति और भुगतान खाता दर्शाता है। 

प्रश्न १३ - प्राप्त या अप्राप्त, केवल चालू अवधि की सभी राशियों को कौनसे खाते में दर्शाया जाता है?
उत्तर - आय और व्यय खाते में दर्शाया जाता है। 

प्रश्न १४ - दान को, प्राप्ति एवं भुगतान खाते के किस पक्ष में दर्शाया जाता है?
उत्तर - प्राप्ति पक्ष में दर्शाया जाता है। 

प्रश्न १५ - किसी विशेष उद्देश्य या सामान्य  उद्देश्य पूर्ति के लिए अलाभकारी संस्थाएं क्या करती है?
उत्तर - दान करती है। 

प्रश्न १६ - किसी विशेष उद्देश्य के लिए किया गया दान क्या कहलाता है?
उत्तर - विशेष दान कहलाता है। 

प्रश्न १७ - संस्था के सामान्य उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए किया जाने वाला दान क्या कहलाता है?
उत्तर - सामान्य दान कहलाता है। 

प्रश्न १८ - अलाभकारी संस्थाओं में निरंतर आय का स्रोत क्या है?
उत्तर - सामान्य दान है। 

प्रश्न १९ - मृत व्यक्ति की वसीयत के रूप में प्राप्त राशि को अलाभकारी संस्थानों में क्या कहा जाता है?
उत्तर - वसीयत कहा जाता है। 

प्रश्न २० - वसीयत की राशि के उपयोग का उद्देश्य स्पष्ट रूप से बताया गया है तो यह राशि क्या मानी जाती है?
उत्तर - राशि को दायित्व मानते हुए तुलन पत्र में दर्शया जाएगा। 

प्रश्न २१ - अस्पष्ट वसीयत राशि को क्या माना जाता है?
उत्तर - आगम प्रकृति की मानते हुए आय और व्यय खाते में लिखा जाएगा। 

प्रश्न २२ - सामयिक चंदे के स्थान पर जीवन भर के लिए एकमुश्त भुगतान को क्या कहते हैं?
उत्तर - आजीवन सदस्यता शुल्क कहते हैं। 

प्रश्न २३ - आजीवन सदस्यता शुल्क को क्या माना जाता है?
उत्तर - पूँजी प्राप्ति माना जाता है। 

प्रश्न २४ - पूँजी निधि अथवा सामान्य निधि में किसे जमा किया जाता है?
उत्तर - आजीवन सदस्यता शुल्क को, जमा किया जाता है। 

प्रश्न २५ - अलाभकारी संस्थाओं में सदस्य बनाते समय (एक  बार) लिया जाने वाला शुल्क क्या कहलाता है?
उत्तर - सदस्यता (प्रवेश ) शुल्क कहलाता है। 

प्रश्न २६ - अनावृति मानकर सीधे पूँजी निधि अथवा सामान्य निधि में किसे जमा किया जाता है?
उत्तर - प्रवेश शुल्क को जमा किया जाता है। 

प्रश्न २७ - अलाभकारी संस्थानों में पाक्षिकों का विक्रय कौनसी मद है?
उत्तर - आवृति (बार बार होने वाली) प्रकृति की मद है। 

प्रश्न २८ - ऐसा व्यक्ति जो संस्थान का पक्का कर्मचारी नहीं है को किए गए भुगतान को क्या कहेंगे?
उत्तर - सम्मानार्थ पारिश्रिमिक का भुगतान कहेंगे। 

प्रश्न २९ - वसीयत या उपहार से उत्पन्न होने वाली निधि को क्या कहते हैं?
उत्तर - वृत्तिक निधि कहते हैं। 

प्रश्न ३० - तुलन पत्र के दायित्व पक्ष में विशिष्ट उद्देश्य की निधि के रूप में कौनसी राशि दर्शायी जाती है?
उत्तर - वृतिक निधि को दर्शाया जाता है। 

धन्यवाद! 

गुरुवार, 24 दिसंबर 2020

लेखाशास्त्र कक्षा १२ - अलाभकारी संस्थाएं एवं साझेदारी खाते अध्याय १ - B


लेखाशास्त्र कक्षा १२, - अलाभकारी संस्थाएं एवं साझेदारी खाते, 
अध्याय १ (अलाभकारी संस्थानों के लिए लेखांकन) B ,अलाभकारी संस्थानों का अर्थ एवं परिभाषाएं  

नमस्कार, मैं रामावतार कुमावत आपका स्वागत करता हूँ। 

प्रश्न १ -  अलाभकारी संस्थानों की रोकड़ व बैंक लेन देन का सारांश कौनसा खाता होता है?
उत्तर - प्राप्ति एवं भुगतान खाता होता है। 

प्रश्न २ - आय व्यय खाता और तुलन पत्र तैयार करने में कौनसा खाता सहायक होता है?
उत्तर - प्राप्ति एवं भुगतान खाता होता है। 

प्रश्न ३ -  अलाभकारी संस्थानों को कानूनी रूप से समितियों के पंजीकर्ता के पास क्या जमा करवाना आवश्यक है?
उत्तर - प्राप्ति एवं भुगतान खाता, आय व्यय खाता और तुलन पत्र जमा करवाना आवश्यक है। 

प्रश्न ४ - आय और व्यय खाता कौनसे खाते के समान होता है?
उत्तर - लाभ और हानि खाते के समान होता है।  

प्रश्न ५ - लेखा बहियों की शुद्धता की जांच करने के लिए अव्यापारिक संस्थाएं क्या तैयार करती है?
उत्तर - तलपट तैयार करती है। 

प्रश्न ६ - वर्ष के अंत में रोकड़  प्राप्तियों तथा नगद भुगतानों को रोकड़ बही में प्रलेखन के आधार पर अलाभकारी संस्थाएं क्या तैयार करती है?
उत्तर - प्राप्ति एवं भुगतान खाते तैयार करती है। 

प्रश्न ७ - रोकड़ तथा बैंक लेन देन के विभिन्न शीर्षकों का सारांश क्या होता है?
उत्तर - प्राप्ति एवं भुगतान खाता होता है। 

प्रश्न ८ - रोकड़ पुस्तक का सारांश क्या होता है?
उत्तर - प्राप्ति एवं भुगतान खाता होता है। 

प्रश्न ९ -  प्राप्ति एवं भुगतान खाते के किस पक्ष में प्राप्तियां दर्ज की जाती है?
उत्तर - नाम पक्ष में दर्ज की जाती है। 

प्रश्न १० - प्राप्ति एवं भुगतान खाते के किस पक्ष में भुगतान दर्ज किए जाते हैं?
उत्तर - जमा पक्ष में दर्ज किए जाते हैं। 

प्रश्न ११ - संबंधित वर्ष की प्राप्तियां तथा भुगतानों की कुल राशि कौन दर्शाता है?
उत्तर - प्राप्ति एवं भुगतान खाता दर्शाता है। 

प्रश्न १२ - आयगत या पूंजीगत सभी प्रकृति के प्राप्ति एवं भुगतान कौनसे खाते में दर्शाये जाते हैं?
उत्तर - प्राप्ति एवं भुगतान खाते में दर्शाये जाते हैं। 

प्रश्न १३ - रोकड़ तथा बैंक से सम्बंधित प्राप्तियों व भुगतानों में कौनसा खाता अंतर नहीं करता है?
उत्तर - प्राप्ति एवं भुगतान खाता अंतर नहीं करता है। 

प्रश्न १४ - किसी भी गैर रोकड़ मद जैसे ह्रास, बकाया, व्यय तथा अर्जित आय इत्यादि को कौनसे खाते में नहीं दर्शाया जाता है?
उत्तर - प्राप्ति एवं भुगतान खाते में नहीं दर्शाया जाता है। 

प्रश्न १५ - प्राप्ति एवं भुगतान खाते का अंतिम शेष आम तौर पर क्या होता है?
उत्तर - नाम शेष होता है। 

प्रश्न १६ - हस्तस्थ रोकड़ तथा बैंक के आरंभिक शेष को प्राप्ति एवं भुगतान खाते के किस पक्ष में लिखा जाता है?
उत्तर - नाम पक्ष में लिखा जाएगा। 

प्रश्न १७ - प्राप्ति एवं भुगतान खाते के नाम पक्ष में क्या लिखा जाएगा?
उतर - सभी प्राप्तियों की कुल राशि को लिखा जाएगा। 

प्रश्न १८ - प्राप्ति एवं भुगतान खाते के जमा पक्ष में क्या लिखा जाएगा?
उत्तर - सभी भुगतान की गयी राशियों को लिखा जाएगा। 

प्रश्न १९ - अप्राप्त आय  देय व्ययों को कौनसे खाते में नहीं दर्शाया जाएगा?
उत्तर - प्राप्ति एवं भुगतान खाते में नहीं दर्शाया जाएगा। 

प्रश्न २० - अलाभकारी संस्थानों में एक लेखा वर्ष के लिए आय और व्यय का सारांश कौनसा खाता होता है? 
उत्तर - आय और व्यय खाता होता है। 

प्रश्न २१ - एक व्यापारिक संस्थान द्वारा उपार्जन आधार पर तैयार किए गए लाभ और हानि खाते की तरह ही , अव्यापारिक संस्थान का कौन सा खाता होता है?
उत्तर - आय और व्यय खाता होता है। 

प्रश्न २२ - सभी व्यय तथा हानियों को व्यय पक्ष में किस खाते में लिखा जाता है?
उत्तर - आय और व्यय खाते में लिखा जाता है। 

प्रश्न २३ - सभी आय तथा लाभों को आय पक्ष में किस खाते में लिखा जाता है?
उतर - आय और व्यय खाते में लिखा जाता है। 

प्रश्न २४ - प्राप्ति एवं भुगतान खाते से कौन सा खाता बनाया जाता है?
उत्तर - आय और व्यय खाता बनाया जाता है।  

प्रश्न २५ - प्रकृति के आधार पर आय और व्यय खाते तथा प्राप्ति एवं भुगतान खाते में क्या अंतर है?
उत्तर - आय व्यय खाता लाभ हानि खाते के समान होता है, जबकि प्राप्ति एवं भुगतान खाता रोकड़ पुस्तक का सारांश होता है। 

प्रश्न २६ - मदों की प्रकृति के आधार पर आय और व्यय खाते तथा प्राप्ति एवं भुगतान खाते में क्या अंतर है?
उत्तर - आय और व्यय खाता केवल आगम प्रकृति के आय और व्यय का अभिलेख करता है, जबकि प्राप्ति एवं भुगतान खाता आगम और पूँजी की प्राप्तियों और भुगतानों का अभिलेख करता है। 

प्रश्न २७ - अवधि के आधार पर आय और व्यय खाते तथा प्राप्ति एवं भुगतान खाते में क्या अंतर है?
उत्तर - आय और व्यय खाता केवल चालू अवधि से सम्बंधित आय और व्यय की मदों को दर्शाता है। जबकि प्राप्ति एवं भुगतान खाता गत और आगामी अवधि से भी सम्बंधित प्राप्तियों एवं भुगतान की मदों को दर्शाता है।    

प्रश्न २८ - नाम पक्ष के आधार पर आय और व्यय खाते तथा प्राप्ति एवं भुगतान खाते में क्या अंतर है?
उत्तर - आय और व्यय खाते के नाम पक्ष में व्ययों और हानियों का अभिलेख किया जाता है। जबकि प्राप्ति एवं भुगतान खाते के नाम पक्ष में प्राप्तियों का अभिलेख किया जाता। है 

प्रश्न २९ - जमा पक्ष के आधार पर आय और व्यय खाते तथा प्राप्ति एवं भुगतान खाते में क्या अन्तर है?
उत्तर - आय और व्यय खाते के जमा पक्ष में आय और अभिलाभों का अभिलेखन किया जाता है। जबकि प्राप्ति एवं भुगतान खाते के जमा पक्ष में भुगतानों का अभिलेखन किया जाता है। 

प्रश्न ३० - ह्रास के आधार पर आय और व्यय खाते तथा प्राप्ति एवं भुगतान खाते में क्या अंतर है?
उत्तर - आय और व्यय खाते में ह्रास सम्मिलित किया जाता है। जबकि प्राप्ति एवं भुगतान खाते में ह्रास सम्मिलित नहीं किया जाता है। 

प्रश्न ३१ - आरंभिक शेष के आधार पर आय और व्यय खाते तथा प्राप्ति एवं भुगतान खाते में क्या अंतर है?
उत्तर - आय और व्यय खाते में आरंभिक शेष नहीं होता है। जबकि प्राप्ति एवं भुगतान खाते में आरंभिक शेष हस्तस्थ व बैंकस्ठ रोकड़ या आरंभिक अधिविकर्ष को दर्शाता है। 

प्रश्न ३२ - अंतिम शेष के आधार पर आय और व्यय खाते तथा प्राप्ति एवं भुगतान खाते में क्या अंतर है?
उत्तर - आय और व्यय खाते में अंतिम शेष आय का व्यय पर आधिक्य या इसके विपरीत स्थिति को दर्शाता है। जबकि प्राप्ति एवं भुगतान खाते में अंतिम शेष अन्त में हस्तस्थ रोकड़ तथा बैंक शेष या बैंक अधिविकर्ष को दर्शाता है। 

धन्यवाद! 

सोमवार, 17 अगस्त 2020

व्यवसाय अध्ययन - कक्षा १२ अध्याय १ (ब) - प्रबंध: परिचय, महत्व, प्रकृति ए...

व्यवसाय अध्ययन - कक्षा १२, अध्याय १ (ब) - प्रबंध: परिचय, महत्व, प्रकृति एवं क्षेत्र परिभाषाएं

(राजस्थान शिक्षा बोर्ड)


नमस्कार ! मैं रामावतार कुमावत आपका स्वागत करता हूँ। मैं एक स्वयंपाठी विद्यार्थी हूँ। मैं इस प्रकार पढ़ता हूँ, जिससे मुझे सत्तर प्रतिशत से अधिक याद हो जाता है। धन्यवाद!

प्रश्न १ - "प्रबंध दूसरों से कार्य करवाने की कला है।" यह परिभाषा किसने दी है?
उत्तर - 'मेरी पारकर फोलेट' ने, प्रबंध की यह परिभाषा दी है। 

प्रश्न २ - "अन्य व्यक्तियों के प्रयासों से परिणाम प्राप्त करना ही प्रबंध है।" प्रबंध की यह परिभाषा किसने दी है?
उत्तर - 'लारेंस एप्प्ले' ने दी है। 

प्रश्न ३ - "प्रबंध औपचारिक रूप से संगठित समूहों के द्वारा एवं समूहों में कार्य करवाने की कला है।" प्रबंध की यह परिभाषा किसने दी है?
उत्तर - 'हेराल्ड कुन्टज' ने दी है। 

प्रश्न ४ - "प्रबंध परिवर्तनशील वातावरण में दूसरों के साथ तथा दूसरों से कार्य करवाने की प्रक्रिया है। सीमित संसाधनों का प्रभावी एवं कुशलतापूर्वक उपयोग करना इस प्रक्रिया का आधार है।" प्रबंध की यह परिभाषा किसने दी है?
उत्तर - 'क्रीटनर' ने दी है। 

प्रश्न ५ - "संस्था के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए मानवीय एवं भौतिक साधनों का प्रभावकारी उपयोग ही प्रबंध है। "
प्रबंध की यह परिभाषा किसने दी है?
उत्तर - 'ग्लूएक' ने दी है। 


प्रश्न ६ - "प्रबंध यह जानने की कला है कि आप क्या करना चाहते हैं और तत्पश्चात यह सुनिश्चित करना कि वह कार्य सर्वोत्तम एवं मितव्ययितापूर्ण विधि से किया जाए। " प्रबंध की यह परिभाषा किसने दे है?
उत्तर - वैज्ञानिक प्रबंध के जन्मदाता 'टेलर' ने दी है। 

प्रश्न ७ - "प्रबंध पूर्व निर्धारित लक्ष्यों  की प्राप्ति के उद्देश्य से निर्णय लेने तथा मानवीय क्रियाओं  पर नियंतरण करने की प्रक्रिया है। " यह परिभाषा किसने दी है?
उत्तर - 'स्टेनले वेन्स ' ने दी है। 

प्रश्न ८ - "प्रबंध निर्णय करने तथा नेतृत्व प्रदान करने की कला एवं विज्ञान है। " प्रबंध की यह परिभाषा किसने दी है?
उत्तर - 'प्रो. क्लग' ने दी है। 

प्रश्न  ९ - "प्रबंध वह प्रक्रिया है जिसमें प्रबंधक समन्विन्त एवं सहकारी मानवीय प्रयासों की सहायता से उद्देश्य पूर्ण संगठनों  का सृजन, निर्देशन, संरक्षण तथा संचालन करते हैं।" प्रबंध की यह परिभाषा किसने दी है?
उत्तर - 'मैक्फरलैण्ड' ने दी है।

प्रश्न १० - "प्रबंध का अर्थ उस तकनीक से है, जिसके द्वारा एक विशिष्ट ज्ञान एवं मानव समुदाय के उद्देश्यों का निर्धारण, स्पष्टीकरण, एवं क्रियान्वयन किया जाता है। " प्रबंध की यह परिभाषा किसने दी है?
उत्तर - 'पीटरसन एंड प्लाऊमैन ' ने दी है। 

प्रश्न ११ - "प्रबंध नियोजन, संघठन, निर्देशन, एवं नियंत्रण द्वारा संस्था के संसाधनों के आबंटन की प्रक्रिया है, ताकि ग्राहकों की इच्छित वस्तुओं व सेवाओं का उत्पादन कर, संस्था के उद्देश्यों को पूरा किया जा सके। इस प्रक्रिया में कार्य का निष्पादन प्रतिदिन परिवर्तनशील व्यावसायिक वातावरण में संघठन के कर्मचारियों  के द्वारा किया जाता है। " प्रबंध की यह परिभाषा किसने दी है?
उत्तर - 'थिरोफ़, कलेकैम्प एवं ग्रेडिग ' ने दी है।   

प्रश्न १२ - "प्रबंध एक ऐसे वातावरण का निर्माण करने तथा उसे बनाए रखने की प्रक्रिया है जिसमें लोग समूह में कार्य करते हुए उद्देश्यों को दक्षता पूर्ण पूरा करते हैं। " प्रबंध की यह परिभाषा किसने दी है?
उत्तर - 'विहंरीच तथा कुइंज' ने दी है। 

प्रश्न १३ - "प्रबंध व्यवस्थित ज्ञान का समूह है जो व्यावसायिक पेशे के संदर्भ में प्रमापित सामान्य प्रबंध के कुछ सिद्धांतों पर आधारित है।" प्रबंध की यह परिभाषा किसने दी है?
उत्तर - 'लुइस ए एलन' ने दी है।  

प्रश्न १४ - प्रबंधक क्या करते ?
उत्तर - प्रबंधक अन्य लोगों से कार्य करवाते हैं और वे स्वयं नियोजन, संघठन, निर्देशन एवं नियंत्रण का कार्य करते हैं। प्रबंध की यह विशेषता है। 

प्रश्न १५ - प्रबंध की मुख्य विशेषता अथवा लक्षण क्या है?
उत्तर - प्रबंध के पूर्व निर्धारित लक्ष्य होते हैं, प्रबंध कार्य निरुद्देश्य एवं लक्ष्यहीन नहीं होता है। 

प्रश्न १६ - प्रबंध करना आसान कब होता है?
उत्तर - प्रबंध कार्य औपचारिक समूहों में किया जाने से आसान होता है। 

प्रश्न  १७ - असंगठित व्यक्तियों को हम क्या कहते हैं?
उत्तर - 'भीड़' कहते है, जिसका प्रबंध करना कठिन होता है। 

प्रश्न १८ - प्रबंध कैसा कार्य है?
उत्तर - प्रबंध एक 'मानवीय' कार्य है। प्रबंध कार्य समाज के विशिष्ट व्यक्तियों द्वारा किया जाने वाला कार्य है। ऐसे व्यक्ति (प्रबंधक) विशिष्ट ज्ञान, अनुभव एवं अनुभूति वाले होते हैं। 

प्रश्न १९ - प्रबंध कैसा कार्य है?
उत्तर - प्रबंध 'चुनौती पूर्ण' कार्य है। यह असंगठित संसाधनों का उपयोग कर उपयोगी उत्पादों व सेवाओं का उत्पादन करने में सक्षम है। 

प्रश्न २० - प्रबंध कैसा कार्य है?
उत्तर - प्रबंध एक 'सृजनात्मक ' कार्य है। यह साधनों की प्रभावशीलता एवं दक्षता को बढाकर अधिकाधिक उत्पादकता का सृजन करने में योगदान देता है।

प्रश्न २१ - प्रबंध किस आधार पर कार्य करता है?
उत्तर - प्रबंध कुछ सामान्य सिद्धांतों पर कार्य करता है जिनका प्रतिपादन विभिन्न शिक्षाविदों, चिंतकों एवं प्रबंधकों के गहन शोध व अनुभव के आधार पर होता है। 

प्रश्न २२ - प्रबंधक में कौनसी क्षमता आवश्यक है?
उत्तर -  'नेतृत्व' करने की क्षमता प्रबंधक में अति आवश्यक है। 

प्रश्न २३ - प्रबंधक अपने कार्य किस माध्यम से करता है?
उत्तर - 'निर्णय क्षमता' के माध्यम से करता है। किसी कार्य को करने अथवा टालने की निर्णय क्षमता प्रबंधक की विशेषता होती है। 

प्रश्न २४ - प्रबंधक दूसरों से कार्य करवाने के लिए क्या करते हैं?
उत्तर - अपने कुछ अधिकारों को अपने अधीनस्थों को सौंपता है और अधीनस्थ अपने अधीनस्थों को सौंपते हैं जिससे प्रत्येक अधीनस्थ अपने अधिकारों के प्रति उत्तरदायी बन जाता है।