लेखाशास्त्र कक्षा १२ -अध्याय २A, - साझेदारी लेखांकन - ,आधारभूत अवधारणाएँ
नमस्कार, मैं रामावतार कुमावत आपका स्वागत करता हूँ।
प्रश्न १ - व्यवसायी लोग किन परिस्थितियों में साझेदारी को अपनाकर संगठन की रचना करते हैं?
उत्तर - जब व्यवसाय विस्तारित होता है तब व्यवसाय की देखभाल तथा उसके जोखिमों को उठाने के लिए अधिक पूँजी तथा मानव संसाधनों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए व्यावसायी लोग साझेदारी की रचना करते हैं।
प्रश्न २ - एक साझेदारी संस्था कब अस्तित्व में आती है?
उत्तर -जब कम से कम दो व्यक्ति एक साथ मिलकर व्यवसाय को आरम्भ करने के लिए सहमत होते हैं, तब।
प्रश्न ३ - भारतीय साझेदारी अधिनियम १९३२ के अनुभाग ४ के अनुसार साझेदारी की परिभाषा क्या है?
उत्तर - "साझेदारी उन व्यक्तियों के बीच एक सम्बन्ध है जो एक ऐसे व्यवसाय के लाभ को बाँटने के लिए सहमत हैं जिसका संचालन उन सब के द्वारा या उनमें से किसी एक के द्वारा किया जाता है।"
प्रश्न ४- जब एक व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत रूप से साझेदारी में सम्मिलित होता है तो उसे क्या कहते हैं?
उत्तर - साझेदार कहते हैं।
प्रश्न ५ - साझेदार एक साथ मिलकर क्या कहलाते हैं?
उत्तर - फर्म कहलाते हैं।
प्रश्न ६ - जिस नाम के अंतर्गत साझेदारी व्यवसाय संचालित होता है उसे क्या कहते हैं?
उत्तर - फर्म का नाम कहते हैं।
प्रश्न ७ - साझेदारी की अनिवार्य एवं महत्वपूर्ण विशिष्टाएँ क्या हैं?
उत्तर - १. दो या दो से अधिक व्यक्ति,
२. अनुबंध या समझौता ,
३. व्यवसाय ,
४. पारस्परिक अभिकरण,
५. लाभ का विभाजन,
६. साझेदार के उत्तरदायित्व आदि साझेदारी की अनिवार्य एवं महत्वपूर्ण विशिष्टाएँ हैं।
प्रश्न ८ - एक एकेला व्यक्ति साझेदार क्यों नहीं हो सकता है?
उत्तर - क्यों कि वह स्वयं के साथ अनुबंध या समझौता नहीं कर सकता है।
प्रश्न ९ - जब दो या दो से अधिक व्यक्ति एक व्यवसाय स्थापित करने और उसके लाभों एवं हानियों की भागीदारी के लिए सहमत होते हैं तो वे क्या माने जाते हैं?
उत्तर - साझेदार या भागीदार माने जाते हैं।
प्रश्न १० - साझेदारी गठन में कम से कम कितने व्यक्तियों को साथ आना चाहिए?
उत्तर - कम से कम दो व्यक्तियों को साथ आना चाहिए।
प्रश्न ११ - एक फर्म के गठन में कम से कम कितने साझेदार हो सकते हैं?
उत्तर - कम से कम दो साझेदार हो सकते हैं।
प्रश्न १२ - व्यवसाय चलाने व लाभ-हानि बांटने के लिए दो या दो से अधिक व्यक्तियों के मध्य साझेदारी किसका परिणाम होती है?
उत्तर - अनुबंध या समझौते का परिणाम होती है।
प्रश्न १३ - व्यवसाय चलाने तथा आपसी संबंधो के लिए साझेदारी का आधार क्या होता है?
उत्तर - समझौता या अनुबंध साझेदारी का आधार होता है।
प्रश्न १४ - साझेदारों के मध्य साझेदारी या भागीदारी किस आधार पर होती है?
उत्तर - अनुबंध (समझौते) के आधार पर करते हैं।
प्रश्न १५ - साझेदारों के मध्य कौनसे अनुबंध वैध होते हैं?
उत्तर - लिखित व मौखिक दोनों ही अनुबंध वैध होते हैं।
प्रश्न १६ - किसी तरह के विवाद से बचने के लिए साझेदारों के मध्य कौनसे अनुबंध को प्राथमिकता दी जाती है?
उत्तर - लिखित अनुबंध (समझौते) को प्राथमिकता दी जाती है।
प्रश्न १७ - साझेदारों के मध्य समझौता (अनुबंध) क्यों किया जाता है?
उत्तर - एक वैध व्यवसाय को चलाने के लिए किया जाता है।
प्रश्न १८ - साझेदारी के एक व्यवसाय को चलाने के लिए कौनसा सम्बन्ध अत्यंत महत्वपूर्ण होता है?
उत्तर - पारस्परिक अभिकरण का सम्बन्ध अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
प्रश्न १९ - साझेदारी या भागीदारी का महत्वपूर्ण तत्व क्या होता है?
उत्तर - फर्म के लाभों को आपस में बांटना होता है जो नकारात्मक भी हो सकता है।
प्रश्न २० - फर्म के सभी कार्यों के लिए संयुक्त रूप से तथा स्वतन्त्र रूप से दूसरे साझेदारों के साथ कौन उत्तरदायी होता है?
उत्तर - प्रत्येक साझेदार उत्तरदायी होता है।
प्रश्न २१ - साझेदारों के बीच समझौते के परिणाम स्वरूप किसका जन्म होता है?
उत्तर - साझेदारी का जन्म होता है।
प्रश्न २२ - साझेदारों के बीच समझौते के विवरण समाहित होने वाले अभिलेख को क्या कहते हैं?
उत्तर - साझेदारी विलेख कहते हैं।
प्रश्न २३ - साझेदारी विलेख की शर्तों में बदलाव के लिए क्या आवश्यक है?
उत्तर - सभी साझेदारों की सहमति आवश्यक है।
प्रश्न २४ - साझेदारों के बीच संबंधों को प्रभावित करने वाले पहलुओं की सूचना कहाँ समाहित की जाती है?
उत्तर - साझेदारी विलेख में समाहित की जाती है।
प्रश्न २५ - स्टाम्प अधिनियम (स्टैंप एक्ट) के प्रावधान के अनुसार उचित प्रकार से प्रारूपित एवं तैयार क्या करना चाहिए?
उत्तर - साझेदारी विलेख को उचित प्रारूप में तैयार किया जाना चाहिए।
प्रश्न २६ - रजिस्टार (पंजीयक) से पंजीकृत क्या कराया जाना चाहिए?
उत्तर - साझेदारी विलेख को पंजीकृत कराया जाना चाहिए?
प्रश्न २७ - साजेदारी विलेख में सामान्यतः कौन से विवरणों को शामिल किया जाता है?
उत्तर - १. फर्म का नाम, पता और मुख्य व्यवसाय,
२. सभी साझेदारों नाम व पते,
३. प्रत्येक साझेदार द्वारा लगाई गयी पूँजी की राशि,
४. फर्म की लेखांकन अवधि,
५. साझेदारी प्रारम्भ करने की तिथि,
६. बैंक खातों का संचालन,
७. लाभ व हानि के विभाजन का अनुपात,
८. पूँजी, ऋणों एवं आहरणों आदि पर ब्याज की दर,
९. अंकेक्षक की नियुक्ति का तरीका, यदि कोई हो,
१०. वेतन, कमीशन आदि, यदि किसी साझेदार को देय हो,
११. प्रत्येक साझेदार के अधिकार, कर्तव्य तथा उत्तरदायित्व,
१२. एक या अधिक साझेदारों के दिवालिएपन के कारण से पैदा होने वाली हानि का निष्पादन,
१३. फर्म के विघटन पर खातों का निपटारा,
१४. साझेदारों के मध्य होने वाले आपसी विवादों का निपटान,
१५. एक साझेदार का प्रवेश, सेवानिवृति तथा मृत्यु की स्थिति में अनुपालित किए जाने वाले नियम तथा
१६. व्यवसाय संचालन से सम्बंधित कोई भी अन्य मसला आदि का समावेश होता है।
धन्यवाद!
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