सोमवार, 4 जनवरी 2021

लेखाशास्त्र कक्षा 12 -अध्याय 2 B, - साझेदारी लेखांकन - ,आधारभूत अवधारणाएँ

 लेखाशास्त्र कक्षा 12 -अध्याय 2 B, - साझेदारी लेखांकन - ,आधारभूत अवधारणाएँ 


नमस्कार, मैं रामावतार कुमावत आपका स्वागत करता हूँ। 



प्रश्न 1 - साझेदारों के मध्य संबंधों को प्रभावित करने वाले सभी मसले किसके अंतर्गत समाहित होते हैं?

उत्तर - साझेदारी विलेख में समाहित होते हैं। 


प्रश्न 2 - कुछ विशिष्ट मुद्दों पर विलेख में अभिव्यक्त नहीं होने पर कौनसे प्रावधान लागू होते हैं?

उत्तर - भारतीय साझेदारी अधिनियम १९३२ के प्रावधान लागू होते हैं। 


प्रश्न 3 - साझेदारी खातों को प्रभावित करने वाले प्रावधान कौन कौन से हैं?

उत्तर - 1. लाभ व हानि विभाजन अनुपात,

2. पूँजी पर ब्याज, 

3. आहरण पर ब्याज,

4. प्रवृद्ध राशि पर ब्याज,

5. फर्म के कार्यों हेतु परिश्रिमिक आदि हैं। 


प्रश्न 4 - यदि समझौता विलेख लाभ हानि अनुपात पर अस्पष्ट या मौन है तब फर्म के लाभ हानि का साझेदारों के मध्य किस अनुपात में विभाजित किया जाएगा?

उत्तर - बराबर अनुपात में विभाजित किया जायेगा। 


प्रश्न 5 - साझेदारों द्वारा फर्म में लगाई गयी पूँजी का अनुपात समान (बराबर) नहीं होते हुए भी लाभ व हानि का विभाजन  बराबर अनुपात में कब बांटा जाता है?

उत्तर - लाभ विभाजन अनुपात पर समझौते विलेख के अस्पष्ट या मौन होने पर सभी में बराबर विभाजन होगा। 


प्रश्न 6 - साझेदारों की पूँजी पर ब्याज कब नहीं दिया जाता है?

उत्तर - स्पष्ट विलेख के अभाव में साझेदारों की पूँजी पर ब्याज नहीं दिया जाता है। 


प्रश्न 7 - विलेख में स्पष्ट उल्लेख न होने पर साझेदारों के आहरण पर कितना ब्याज लिया जाता है?

उत्तर - कोई ब्याज नहीं लिया जाता है। 


प्रश्न 8 - किसी साझेदार द्वारा प्रवृद्ध राशि के रूप में लगाई गयी पूँजी पर कितना ब्याज दिया जा सकता है?

उत्तर - 6% वार्षिक दर पर दिया जा सकता है। 


प्रश्न 9 - कोई भी साझेदार फर्म के व्यवसाय को चलाने के लिए वेतन या पारश्रमिक पाने का हकदार कब हो सकता है?

उत्तर - विलेख में स्पष्ट उल्लेख होने पर ही पारश्रिमिक पाने का हकदार होता है। 


प्रश्न 10 - साझेदारी फर्म के लिए लेखांकन निष्पादन किस प्रकार होता है?

उत्तर - ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार एकल स्वामित्व के व्यवसाय वाली फर्मों में होता है। 


प्रश्न 11 - एकल स्वामित्व व साझेदारी फर्म के लेखांकन निष्पादन में अपवाद स्वरूप क्या अंतर होते है?

 उत्तर - 1. साझेदार के पूँजी खाते का अनुरक्षण,

2. साझेदारों के बीच लाभ व हानि का वितरण, 

3. पिछले लाभों के  गलत विनियोग के लिए समायोजन,

4. साझेदारी फर्म का पुनर्गठन तथा 

5. साझेदारी फर्म का विघटन आदि। 


प्रश्न 12 - साझेदार तथा फर्म से सम्बंधित सभी लेनदेन किस माध्यम से उनके खातों में अभिलेखित किया जाता है?

उत्तर - उनके पूँजी खातों के माध्यम से अभिलेखित किया जाता है। 


प्रश्न 13 - पूँजी के रूप में लगाई गयी धन राशि, 

पूँजी की निकासी, लाभ का भाग, पूँजी पर ब्याज, आहरण पर ब्याज, साझेदार का वेतन तथा कमीशन आदि को किन खातों में अभिलेखित किया जाता है?

उत्तर - साझेदारों के पूँजी खातों में अभिलेखित किया जाता है। 


प्रश्न 14 - साझेदारों के पूँजी खातों को किन दो विधियों में अनुरक्षित किया जा सकता है?

उत्तर - 1. स्थिर पूँजी विधि तथा 

2. अस्थिर पूँजी विधि है। 


प्रश्न 15 - स्थिर पूँजी खाता विधि तथा अस्थिर पूँजी खाता विधि में क्या अंतर है?

उत्तर - साझेदार के पूँजी खाते में प्रत्यक्ष रूप से पूँजी की निकासी अतिरिक्त या आहरण के रूप में लेखा बद्ध की गयी है अथवा नहीं, यही अंतर है। 


प्रश्न 16 - साझेदारी में प्रत्येक साझेदार के दो खाते कौनसी पूँजी विधि में होते हैं?

उत्तर - स्थिर पूँजी विधि में प्रत्येक साझेदार के दो खाते रखे जाते हैं। 


प्रश्न 17 - स्थिर पूँजी विधि में  साझेदार के दो खाते कौन कौनसे होते हैं?

उत्तर -. साझेदार का पूँजी खाता एवं 

2. साझेदार का चालू खाता होते हैं। 


प्रश्न 18 - साझेदार के कौन से खाता जमा शेष साल-दर- साल कौनसी पूँजी विधि में प्रदर्शित करते हैं?

उत्तर - स्थिर पूँजी विधि में हमेशा जमा शेष प्रदर्शित होते हैं। 


प्रश्न 19 - अतिरिक्त पूँजी लगाना या पूँजी के एक भाग को निकालना किस पूँजी विधि में संभव है?

उत्तर - स्थिर पूँजी विधि में , साझेदारों की सहमति के अनुसार ही संभव है। 


प्रश्न 20 - लाभ की भागीदारी, पूँजी पर ब्याज, आहरण आदि सभी लेन देन साझेदार के पूँजी खाते से अलग चालू खाते द्वारा कौनसी पूँजी विधि में किए जाते हैं?

उत्तर - स्थिर पूँजी विधि में किए जाते हैं। 


प्रश्न 21- नाम शेष को परिसम्पति की तरफ और जमा शेष को देनदारियों की ओर कौनसे खाते में प्रदर्शित किया जाता है?

उत्तर - साझेदार के चालूखाते के तुलन पत्र में प्रदर्शित किया जाता है। 


प्रश्न 22 - प्रत्येक साझेदार के लिए एक ही अर्थात मात्र पूँजी खाता कौनसी पूँजी विधि में रखा जाता है?

उत्तर - अस्थिर पूँजी विधि में साझेदार का एक ही खाता रखा जाता है। 


प्रश्न 23 - साझेदार के सभी समायोजन जैसे लाभ एवं हानि का भाग, पूँजी पर ब्याज, साझेदार का वेतन या कमीशन आदि साझेदार के पूँजी खाते में सीधे अभिलेखित किस पूँजी विधि में किए जाते हैं?

उत्तर - अस्थिर पूँजी विधि में अभिलेखित किए जाते हैं। 


प्रश्न 24 - साझेदार की पूँजी में घट बढ़ किस खाते में होती है?

उत्तर - अस्थिर पूँजी खाते में होती है। 


प्रश्न 25 - खातों की संख्या के आधार पर स्थिर पूँजी एवं अस्थिर पूँजी विधि में क्या अंतर है?

उत्तर - स्थिर पूँजी विधि में अंतर्गत प्रत्येक साझेदार के लिए दो खाते अलग अलग सुस्थापित किए जाते हैं अर्थात साझेदार का पूँजी खाता एवं साझेदार का चालू खाता होते हैं। जबकि अस्थिर पूँजी विधि में प्रत्येक साझेदार के लिए एक ही (पूँजी) खाता होता है। 


धन्यवाद!


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