लेखाशास्त्र कक्षा १२, - अलाभकारी संस्थाएं एवं साझेदारी खाते,
अध्याय १ (अलाभकारी संस्थानों के लिए लेखांकन) B ,अलाभकारी संस्थानों का अर्थ एवं परिभाषाएं
नमस्कार, मैं रामावतार कुमावत आपका स्वागत करता हूँ।
प्रश्न १ - अलाभकारी संस्थानों की रोकड़ व बैंक लेन देन का सारांश कौनसा खाता होता है?
उत्तर - प्राप्ति एवं भुगतान खाता होता है।
प्रश्न २ - आय व्यय खाता और तुलन पत्र तैयार करने में कौनसा खाता सहायक होता है?
उत्तर - प्राप्ति एवं भुगतान खाता होता है।
प्रश्न ३ - अलाभकारी संस्थानों को कानूनी रूप से समितियों के पंजीकर्ता के पास क्या जमा करवाना आवश्यक है?
उत्तर - प्राप्ति एवं भुगतान खाता, आय व्यय खाता और तुलन पत्र जमा करवाना आवश्यक है।
प्रश्न ४ - आय और व्यय खाता कौनसे खाते के समान होता है?
उत्तर - लाभ और हानि खाते के समान होता है।
प्रश्न ५ - लेखा बहियों की शुद्धता की जांच करने के लिए अव्यापारिक संस्थाएं क्या तैयार करती है?
उत्तर - तलपट तैयार करती है।
प्रश्न ६ - वर्ष के अंत में रोकड़ प्राप्तियों तथा नगद भुगतानों को रोकड़ बही में प्रलेखन के आधार पर अलाभकारी संस्थाएं क्या तैयार करती है?
उत्तर - प्राप्ति एवं भुगतान खाते तैयार करती है।
प्रश्न ७ - रोकड़ तथा बैंक लेन देन के विभिन्न शीर्षकों का सारांश क्या होता है?
उत्तर - प्राप्ति एवं भुगतान खाता होता है।
प्रश्न ८ - रोकड़ पुस्तक का सारांश क्या होता है?
उत्तर - प्राप्ति एवं भुगतान खाता होता है।
प्रश्न ९ - प्राप्ति एवं भुगतान खाते के किस पक्ष में प्राप्तियां दर्ज की जाती है?
उत्तर - नाम पक्ष में दर्ज की जाती है।
प्रश्न १० - प्राप्ति एवं भुगतान खाते के किस पक्ष में भुगतान दर्ज किए जाते हैं?
उत्तर - जमा पक्ष में दर्ज किए जाते हैं।
प्रश्न ११ - संबंधित वर्ष की प्राप्तियां तथा भुगतानों की कुल राशि कौन दर्शाता है?
उत्तर - प्राप्ति एवं भुगतान खाता दर्शाता है।
प्रश्न १२ - आयगत या पूंजीगत सभी प्रकृति के प्राप्ति एवं भुगतान कौनसे खाते में दर्शाये जाते हैं?
उत्तर - प्राप्ति एवं भुगतान खाते में दर्शाये जाते हैं।
प्रश्न १३ - रोकड़ तथा बैंक से सम्बंधित प्राप्तियों व भुगतानों में कौनसा खाता अंतर नहीं करता है?
उत्तर - प्राप्ति एवं भुगतान खाता अंतर नहीं करता है।
प्रश्न १४ - किसी भी गैर रोकड़ मद जैसे ह्रास, बकाया, व्यय तथा अर्जित आय इत्यादि को कौनसे खाते में नहीं दर्शाया जाता है?
उत्तर - प्राप्ति एवं भुगतान खाते में नहीं दर्शाया जाता है।
प्रश्न १५ - प्राप्ति एवं भुगतान खाते का अंतिम शेष आम तौर पर क्या होता है?
उत्तर - नाम शेष होता है।
प्रश्न १६ - हस्तस्थ रोकड़ तथा बैंक के आरंभिक शेष को प्राप्ति एवं भुगतान खाते के किस पक्ष में लिखा जाता है?
उत्तर - नाम पक्ष में लिखा जाएगा।
प्रश्न १७ - प्राप्ति एवं भुगतान खाते के नाम पक्ष में क्या लिखा जाएगा?
उतर - सभी प्राप्तियों की कुल राशि को लिखा जाएगा।
प्रश्न १८ - प्राप्ति एवं भुगतान खाते के जमा पक्ष में क्या लिखा जाएगा?
उत्तर - सभी भुगतान की गयी राशियों को लिखा जाएगा।
प्रश्न १९ - अप्राप्त आय देय व्ययों को कौनसे खाते में नहीं दर्शाया जाएगा?
उत्तर - प्राप्ति एवं भुगतान खाते में नहीं दर्शाया जाएगा।
प्रश्न २० - अलाभकारी संस्थानों में एक लेखा वर्ष के लिए आय और व्यय का सारांश कौनसा खाता होता है?
उत्तर - आय और व्यय खाता होता है।
प्रश्न २१ - एक व्यापारिक संस्थान द्वारा उपार्जन आधार पर तैयार किए गए लाभ और हानि खाते की तरह ही , अव्यापारिक संस्थान का कौन सा खाता होता है?
उत्तर - आय और व्यय खाता होता है।
प्रश्न २२ - सभी व्यय तथा हानियों को व्यय पक्ष में किस खाते में लिखा जाता है?
उत्तर - आय और व्यय खाते में लिखा जाता है।
प्रश्न २३ - सभी आय तथा लाभों को आय पक्ष में किस खाते में लिखा जाता है?
उतर - आय और व्यय खाते में लिखा जाता है।
प्रश्न २४ - प्राप्ति एवं भुगतान खाते से कौन सा खाता बनाया जाता है?
उत्तर - आय और व्यय खाता बनाया जाता है।
प्रश्न २५ - प्रकृति के आधार पर आय और व्यय खाते तथा प्राप्ति एवं भुगतान खाते में क्या अंतर है?
उत्तर - आय व्यय खाता लाभ हानि खाते के समान होता है, जबकि प्राप्ति एवं भुगतान खाता रोकड़ पुस्तक का सारांश होता है।
प्रश्न २६ - मदों की प्रकृति के आधार पर आय और व्यय खाते तथा प्राप्ति एवं भुगतान खाते में क्या अंतर है?
उत्तर - आय और व्यय खाता केवल आगम प्रकृति के आय और व्यय का अभिलेख करता है, जबकि प्राप्ति एवं भुगतान खाता आगम और पूँजी की प्राप्तियों और भुगतानों का अभिलेख करता है।
प्रश्न २७ - अवधि के आधार पर आय और व्यय खाते तथा प्राप्ति एवं भुगतान खाते में क्या अंतर है?
उत्तर - आय और व्यय खाता केवल चालू अवधि से सम्बंधित आय और व्यय की मदों को दर्शाता है। जबकि प्राप्ति एवं भुगतान खाता गत और आगामी अवधि से भी सम्बंधित प्राप्तियों एवं भुगतान की मदों को दर्शाता है।
प्रश्न २८ - नाम पक्ष के आधार पर आय और व्यय खाते तथा प्राप्ति एवं भुगतान खाते में क्या अंतर है?
उत्तर - आय और व्यय खाते के नाम पक्ष में व्ययों और हानियों का अभिलेख किया जाता है। जबकि प्राप्ति एवं भुगतान खाते के नाम पक्ष में प्राप्तियों का अभिलेख किया जाता। है
प्रश्न २९ - जमा पक्ष के आधार पर आय और व्यय खाते तथा प्राप्ति एवं भुगतान खाते में क्या अन्तर है?
उत्तर - आय और व्यय खाते के जमा पक्ष में आय और अभिलाभों का अभिलेखन किया जाता है। जबकि प्राप्ति एवं भुगतान खाते के जमा पक्ष में भुगतानों का अभिलेखन किया जाता है।
प्रश्न ३० - ह्रास के आधार पर आय और व्यय खाते तथा प्राप्ति एवं भुगतान खाते में क्या अंतर है?
उत्तर - आय और व्यय खाते में ह्रास सम्मिलित किया जाता है। जबकि प्राप्ति एवं भुगतान खाते में ह्रास सम्मिलित नहीं किया जाता है।
प्रश्न ३१ - आरंभिक शेष के आधार पर आय और व्यय खाते तथा प्राप्ति एवं भुगतान खाते में क्या अंतर है?
उत्तर - आय और व्यय खाते में आरंभिक शेष नहीं होता है। जबकि प्राप्ति एवं भुगतान खाते में आरंभिक शेष हस्तस्थ व बैंकस्ठ रोकड़ या आरंभिक अधिविकर्ष को दर्शाता है।
प्रश्न ३२ - अंतिम शेष के आधार पर आय और व्यय खाते तथा प्राप्ति एवं भुगतान खाते में क्या अंतर है?
उत्तर - आय और व्यय खाते में अंतिम शेष आय का व्यय पर आधिक्य या इसके विपरीत स्थिति को दर्शाता है। जबकि प्राप्ति एवं भुगतान खाते में अंतिम शेष अन्त में हस्तस्थ रोकड़ तथा बैंक शेष या बैंक अधिविकर्ष को दर्शाता है।
धन्यवाद!
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