बुधवार, 6 जनवरी 2021

लेखाशास्त्र कक्षा 12, - अध्याय 2 C, - साझेदारी लेखांकन, - आधारभूत अवधारणाएँ


लेखाशास्त्र कक्षा 12, - अध्याय 2 C, - साझेदारी लेखांकन, - आधारभूत अवधारणाएँ 


नमस्कार, मैं रामावतार कुमावत आपका स्वागत करता हूँ। 

प्रश्न 1 - संलेख सम्बन्धी मदों के आधार पर स्थिर पूँजी तथा अस्थिर पूँजी विधि में क्या अंतर है?
उत्तर -  स्थिर पूँजी विधि में आहरण, वेतन, पूँजी पर ब्याज आदि के लिए सभी समायोजन साझेदार के चालू खाते में हस्तांतरित किए जाते हैं। जबकि अस्थिर पूँजी विधि में उपरोक्त सभी समायोजन साझेदार के पूँजी खाते में हस्तांतरित किए जाते है।      

प्रश्न 2 -  पूँजी खाता शेष की स्थिरता के आधार पर स्थिर पूँजी विधि तथा अस्थिर पूँजी विधि में क्या अंतर है?
उत्तर - स्थिर पूँजी विधि में पूँजी खाता शेष सामान्यतः अपरिवर्तित रहता है। जबकि अस्थिर पूँजी विधि में पूँजी खाते का शेष साल दर साल परिवर्तित होता रहता है। 

प्रश्न 3 - जमा शेष के आधार पर स्थिर पूँजी विधि और अस्थिर पूँजी विधि में क्या अंतर है ?
उत्तर - स्थिर पूँजी खाते का शेष सदैव जमा शेष ही प्रदर्शित करता है। जबकि अस्थिर पूँजी विधि में पूँजी खाते का शेष जमा और नाम दोनों हो सकता है। 

प्रश्न 4 - साझेदारी फर्म में लाभ हानि का विभाजन किस प्रकार किया जाता है?
उत्तर - सभी साझेदारों में बनी एक सहमति के अनुपात में किया जाता है। 

प्रश्न 5 - फर्म के लाभ एवं हानियों को सभी साझेदारों द्वारा समान रूप से कब वहन किया जाता है?
उत्तर - साझेदार विलेख के इस सम्बन्ध में मौन होने पर,

प्रश्न 6 - कुल लाभ एवं हानि को सीधे स्वामी के खाते में कब हस्तांतरित किया जाता है?
उत्तर - एकल स्वामित्व की स्थिति में,

प्रश्न 7 - आहरण पर ब्याज, पूँजी पर ब्याज, वेतन व कमीशन आदि को समायोजित करने की आवश्यकता कब होती है?
उत्तर - व्यवसाय का साझेदारी में होने पर, 

प्रश्न 8 - साझेदारों के बीच लाभ सहभाजन अनुपात में लाभ एवं हानि वितरण की अंतिम राशियां दर्शाने का कार्य कौन करता है?
उत्तर - फर्म का लाभ हानि खाता,

प्रश्न 9 - फर्म के लाभ एवं हानि खाते का विस्तार मात्र कौनसा खाता है?
उत्तर - लाभ एवं हानि विनियोग खाता, 

प्रश्न 10 - साझेदारों के बीच लाभ एवं हानि को विनियोजित या विभाजित करने का कार्य कौनसा खाता करता है?
उत्तर - लाभ हानि विनियोग खाता ,

प्रश्न 11 - साझेदारों को पूँजी पर ब्याज, वेतन आदि कब नहीं दिया जाता है?
उत्तर - किसी वर्ष फर्म की हानि होने पर,

प्रश्न 12 - पूँजी पर ब्याज प्रभारित करने के लिए कोई भी साझेदार कब अधिकृत नहीं होता है?
उत्तर - विलेख में सभी साझेदारों की स्पष्ट सहमिति प्राप्त न होने पर,

प्रश्न 13 - साझेदारों द्वारा व्यवसाय में लगाई गयी पूँजी असमान हो लेकिन लाभ में भागीदारी समान होने पर क्या किया जाता है?  
उत्तर - पूँजी पर ब्याज प्रदान किया जाता है। 

प्रश्न 14 - साझेदारों की लगाई गयी पूँजी की भागीदारी समान हो लेकिन लाभ की भागीदारी असमान होने पर क्या किया जाता है?
उत्तर - पूँजी पर ब्याज प्रदान किया जाता है। 

प्रश्न 15 - साझेदारी में पूँजी पर ब्याज का परिकलन और लेखांकन कौनसी अवधि में किया जाता है?
उत्तर - पूँजी की निकासी (आहरण) या सन्निवेश की अवधि के दौरान किया जाता है। 

प्रश्न 16 - ब्याज का भुगतान लाभ की राशि के आधार पर 
सीमित कब किया जा सकता  है?
उत्तर - किसी वर्ष फर्म का अर्जित लाभ साझेदारों की पूँजी पर ब्याज की देय राशि से कम होने पर,

प्रश्न 17 - लाभों का विभाजन प्रभावकारी ढंग से पूँजी पर ब्याज के अनुपात में किस स्थिति में किया जा सकता है?
उत्तर - लाभ साझेदारों की पूँजी पर ब्याज की देय राशि से कम होने की स्थिति में,

प्रश्न 18 - पूँजी पर बनी पूरी ब्याज की राशि को लाभ से प्राप्त करने की अनुमति कब होती है?
उत्तर - सहमत दर पर ब्याज देने के लिए पर्याप्त लाभ होने पर,

प्रश्न 19 - फर्म के अतिरिक्त किसी निजी कार्य के लिए साझेदार द्वारा निकाली गयी राशि क्या कहलाती है?
उत्तर - आहरण कहलाती है। 

प्रश्न 20 - फर्म के अतिरिक्त किसी निजी कार्य हेतु साझेदार द्वारा आहरण की गयी राशि पर ब्याज कब प्रभारित होता है?
उत्तर - साझेदारी विलेख में स्पष्ट लिखित प्रावधान होने पर,

प्रश्न 21 - साझेदार द्वारा प्रतिमाह के पहले दिन एक निश्चित राशि का आहरण किया जाता है तो कुल राशि पर कितने माह के लिए ब्याज लिया जाएगा?
उत्तर - 6.5 माह  के लिए, 

प्रश्न 22 - साझेदार द्वारा प्रत्येक माह के अंतिम दिन आहरण किया जाता है तो ब्याज की गणना कितने समय के लिए की जायेगी?
उत्तर -5.5 माह के लिए,

प्रश्न 23 - साझेदार प्रति माह के मध्य एक निश्चित राशि आहरित करता है तो ब्याज की गणना कितने समय के लिए की जायेगी?
उत्तर - 6 माह के लिए परिकलन होगा। 

प्रश्न 24 - जब धन राशि एक साझेदार द्वारा प्रत्येक तिमाही के आरम्भ में आहरित की जाती है तो ब्याज की समयावधि की गणना कितनी होगी?
उत्तर - 7.5 माह अथवा 12+3/2,

प्रश्न 25 - साझेदार द्वारा प्रत्येक तिमाही के अन्त में एक निश्चित राशि आहरित की जाती है तो ब्याज गणना की समय अवधि कितनी होगी? 
उत्तर - 5.5 माह अथवा 9+0 /2,

प्रश्न 26 - अनियमित समय के अंतराल पर आहरित की गयी राशि पर ब्याज की गणना कितने समय के लिए की जाती है?
उत्तर - 6 माह के लिए,

प्रश्न 27 - जब सभी आहरणों की राशि का विवरण तो दिया गया हो परन्तु आहरणों की तिथि सुस्पष्ट न हो तब वर्ष भर की आहरित राशि को क्या मानेंगे?
उत्तर - अनियमित निकाली हुई राशि ,

प्रश्न 28 - एक स्वामित्व वाली फर्मों तथा साझेदारी फर्मों के बीच क्या अंतर होता है?
उत्तर - साझेदारी फर्म में एक अतिरिक्त लाभ व हानि विनियोग खाता होता है, जबकि एकल स्वामित्व वाली फर्मों में यह नहीं होता है। 

प्रश्न 29 - साझेदारों के बीच सहमति के साथ शर्तें आदि को समाहित करने वाला अभिलेख क्या कहलाता है?
उत्तर - साझेदारी विलेख

प्रश्न 30 - साझेदारी अधिनियम 1932 के उपयुक्त प्रावधान कब लागू होते हैं?
 उत्तर - साझेदारी विलेख में कुछ बातों के मूक होने पर,

धन्यवाद

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