क्षय (तपेदिक) के कितने रोगी?
तपेदिक, यक्ष्मा, राजयक्ष्मा, क्षय आदि टीबी रोग (व्याधि) के पर्यायवाची शब्द हैं।
क्षय एक अति संक्रामक रोग है जो जीवाणुओं द्वारा होता है।
जीवाणु के पर्यायवाची शब्द - दण्डाणु, शलाकाणु, कीटाणु, शुक्ष्मजीवाणु आदि है।
क्षय रोग के इलाज के लिए दिया जाने वाला टीका (समाधान) को बीसीजी (क्षयरोधक टीका)) कहते है।
क्षय रोग का टीका उन जीवाणुओं के प्रोटीन (मांस जातीय खाद्य पदार्थ) से बनता है जो प्रतिरक्षा प्रक्रिया को शुरू करते है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2018 में अनुमानित एक करोड़ (1,00,00,000) लोग क्षय रोग से ग्रसित हुए, जो हाल के वर्षो में अपक्षाकृत स्थिर है।
अप्रकट रूप से विश्व के एक चौथाई (1/4) लोग क्षय रोग से संक्रमित (ग्रसित) हैं।
विश्व के 25% लोगों में क्षय रोग के जीवाणु होने के उपरांत भी इस बिमारी से मात्र 5 से 10 प्रतिशत लोग ही प्रभावित होते हैं।
दवा प्रतिरोधी क्षय रोग स्वास्थ्य के लिए बहुत खतरनाक होता है। इसकी पहचान और निदान कठिन और महंगा भी है।
क्षय रोग के दो तिहाई मरीज (रोगी) विश्व के आठ देशों में है। जिनमें से 27% भारत में, 9% चीन में, 8% इंडोनेशिया में, 6% फिलीपींस में, 6% पाकिस्तान में, 4% नाइजीरिया में, 4% बांग्लादेश में और 3% दक्षिण अफ्रीका में हैं।
पुरे विश्व के क्षय रोग के मामलों में एक चौथाई से अधिक मरीज भारत में हैं।
विश्व स्वास्थ्य संघठन के अनुसार प्रतिवर्ष भारत में क्षय रोग 30 लाख (30,00,000) नए मामले पंजीकृत किए जाते है, इनमें से एक लाख (1,00,000) दवा प्रतिरोधी क्षय रोग के होते हैं।
क्षय रोग से प्रतिवर्ष 4 लाख भारतियों की मृत्यु होती है जो विश्व में सर्वाधिक संख्या है।
क्षय रोग निवारण पर भारत प्रतिवर्ष 17 हजार (17,000, 0000000 ) करोड़ रुपये खर्च करता है।
क्षय रोग के जीवाणु संक्रमित व्यक्ति की सांस, खांसी अथवा छींक से निकलने वाली छोटी से छोटी बूँद के द्वारा भी दूसरे व्यक्ति तक पहुँच सकता है।
क्षय रोग मुख्यतः फेंफड़ो को प्रभावित करता है। साथ ही क्षय रोग शरीर के किसी भी हिस्से जैसे पेट की ग्रंथियां, हड्डी, तंत्रिका तंत्र आदि को भी प्रभावित कर सकता है।
तीन हप्ते तक लगातार खांसी आना, वजन में अप्रत्याशित कमी होना रात को पसीना आना आदि टीबी (क्षय रोग) के आम लक्षण है।
क्षय रोग लाइलाज नहीं है, लेकिन उपचार नहीं करवाने की स्थिति में यह प्राणघातक हो सकता है।
क्षय रोग का उपचार 6 महीने तक क्षय रोग निवारक औषधियों द्वारा संभव है।
बीसीजी टीका (समाधान) क्षय रोग से रक्षा करता है, इसे 35 वर्ष से काम आयु के वयस्कों और बच्चों को दिया जा सकता है, जिन्हे क्षय रोग होने का खतरा हो।
जिस देश में क्षय रोग के रोगी अधिक होते हैं उस देश में यह अधिक फैलता है।
शांत रहकर निरंतर कार्य करना ही श्रेष्ठ है। - रामावतार
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