शुक्रवार, 8 नवंबर 2019

विश्व में प्रतिवर्ष कितना भोजन व्यर्थ जाता है?




विश्व में प्रतिवर्ष कितना भोजन व्यर्थ जाता है?

विश्व में प्रतिवर्ष 1.3 अरब टन (1,30,00,00,00,00,000 किलोग्राम) भोजन व्यर्थ जाता है। 
पृथ्वी पर 90 अरब (90,00,00,00,000) लोग किसी न किसी प्रकार की खाद्य समस्या से जूझ रहें हैं। 
अनुमान के अनुसार पूरे विश्व में तैयार किए जाने वाले भोजन का हर तीसरा भाग (1/3) व्यर्थ चला जाता है। 
विश्व में 82 करोड़ (82,00,00,000) लोगों को खाने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं मिल पाता है। 
भोजन के व्यर्थ जाने का अर्थ है, धन, पानी, ऊर्जा, जमीन और परिवहन साधनों का भी व्यर्थ जाना। 
 व्यर्थ फेंके गए भोजन द्वारा निकलने वाली मीथेन गैस हमारे पर्यावरण के लिए कार्बनडाई गैस से भी 20 गुना नुकसानदेह है। 
फिलीपींस में प्रतिवर्ष 3 हजार टन (30,00,000 किलोग्राम) चावल व्यर्थ भोजन के रूप में फेंका जाता है। 
फिलीपींस में 1.3 करोड़ (1,30,00,000) लोग अपने लिए 3 समय के भोजन की व्यवस्था नहीं कर पाते हैं। 
भोजन का व्यर्थ जाना विश्व की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। 
व्यर्थ भोजन का अधिकतर भाग कचरे के विशाल ढेरों में पहुँच जाता है जो जलवायु परिवर्तन में सहयोग करता है। 
भोजन को व्यर्थ करना जलवायु परिवर्तन को बढ़ाना है। कचरे के ढेरों पर सड़ता भोजन मीथेन गैस पैदा करता है। 
एक लिस्ट बनाइए और उसके अनुसार ही आवश्यक भोजन सामग्री खरीदिए, आवश्यकता से अधिक न खरीदें। 
अगली बार खरीदारी करने तभी जाएं जब पिछली बार की लाई हुई भोजन सामग्री समाप्त हो गई हो। 
भोजन और भोजन सामग्री को अच्छे ढंग से जमा (सहेज कर)रखें। 
सही तरीके से नहीं सहेजी गई भोजन-सामग्री, फल, शब्जी आदि भोजन बनाने से पहले ही सड़ जाती है। 
आलू, टमाटर, लहसुन, खीरे और प्याज कभी फ्रिज में न रखें। इन्हे सामान्य रूप से साफ़ जगह में रखें। 
हरी पत्तियों वाली सब्जियां और धनिया आदि को पानी में रखा जा सकता है। 
ब्रैड को आप फ्रीजर में रख सकते है। फल, शब्जियां आदि ताजा व संभव होतो सीधे किसानों से खरीदें। 
बचे हुए भोजन को फ्रीजर में रख दें और फिर से उपयोग में लीजिए। फ्रीजर अच्छा मित्र है। यह हमें ताजा भोजन का आनंद देता है। 
आवश्यकता से अधिक भोजन न परोसें। 
व्यर्थ फेंके जाने वाले भोजन के बारे में आप जितना अधिक सोचेंगे, पृथ्वी के अनमोल संसाधनों को बचाने में आपका उतना ही योगदान होगा। 
दोपहर का भोजन साथ लेकर जाएं, रेस्त्रां का भोजन खर्चीला और भोजन के व्यर्थ जाने को बढ़ाता है। 
सूप घर पर ही बनाएं, यह भोजन को व्यर्थ जाने से रोकता है। 
यदि सम्भव हो तो शब्जिओं के डंठल, छिलके, ऊपरी हिस्से का भोजन बनाने में प्रयोग करें। शेष व्यर्थ सामग्री से खाद बनाइए। 
खरीदने, पकाने और भोजन करने के छोट-छोटे कदमों से आप पर्यावरण और संसाधनों को बचा सकते हैं। 
होटल, रेस्त्रां को बचा हुआ भोजन जरुरतमंदों को देना चाहिए। अपने ग्राहकों से भी भोजन की बर्बादी रोकने का अनुरोध करना चाहिए। 
भोजन को व्यर्थ फेंकने के कारण उसे लाने, बनाने और बांटने का परिश्रम भी व्यर्थ जाता है। 
शांत रहकर निरंतर कार्य करना ही श्रेष्ठ है। 

धन्यवाद!   





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