रविवार, 15 सितंबर 2019

लेखाशास्त्र -12 (अध्याय - 9)गैर - व्यापारिक संस्थाओं तथा पेशेवर व्यक्तिय...







लेखाशास्त्र -12 (अध्याय
- 9)गैर - व्यापारिक संस्थाओं तथा पेशेवर व्यक्तियों के लेखे
  

नमस्कार मित्रों मैं
रामावतार 'बटुक ' आपका स्वागत करता हूँ। मैं एक स्वयं पाठी विद्यार्थी हूँ। मैं इस
प्रकार पढ़ता हूँ जिससे मुझे सत्तर प्रतिशत से अधिक (70%+) याद हो जाता है।


प्रश्न 1 -
व्यापारिक संस्थाएं किस उद्देश्य
से स्थापित की
जाती है?
उत्तर - व्यापारिक संस्थाएं लाभ
कमाने के उद्देश्य
से स्थापित की
जाती है।

प्रश्न 2 -
लाभ कमाने के
उद्देश्य से स्थापित
की जाने वाली
संस्थाएं कौनसी है ?
उत्तर - 1.
उत्पादन संस्थाएं,
2. निर्मित
माल को क्रय-विक्रय करने वाली
थोक एवं फुटकर
(खुदरा)संस्थाएं ,
3. सेवा प्रदाता संस्थाएं आदि
लाभ कमाने के
उदेश्य से स्थापित
की जाने वाली
संस्थाएं हैं।

प्रश्न 3 -
गैर- व्यापारिक संस्थाएं
क्यों स्थापित की
जाती है?
उत्तर - समाज सेवा
जन सेवा
के उद्देश्य से
गैर- व्यापारिक संस्थाएं
स्थापित की जाती
है।


प्रश्न 4 - गैर - व्यापारिक
संस्थाएं कौन सी है?
उत्तर - 1. साहित्यिक
संस्थाएं ,
2. खेल कूद क्लब ,
3. अस्पताल ,
4. शिक्षण संस्थाएं,
5. कला व सांस्कृतिक
उत्थान के लिए बनाई गई संस्थाएं,
6. कामगार यूनियन,
7. सामजिक कल्याणकारी
कार्य करने वाली आदि गैर -व्यापारिक संस्थाओं में शामिल होती है।

प्रश्न 5 - व्यापारिक
और गैर-व्यापारिक संस्थाओं के लेखे भिन्न क्यों होते हैं?
उत्तर - व्यापारी संस्थाओं
का उद्देश्य लाभ कमाना होता है, जबकि गैर - व्यापारिक संस्थाओं का उद्देश्य समाज सेवा
व जन सेवा है। अतः उद्देश्यों में भिन्नता के कारण लेखों में भी भिन्नता पाई जाती है। 


प्रश्न 6 - पेशेवर
व्यक्ति किसे कहते हैं ?
उत्तर - वे व्यक्ति
जो अपनी बौद्धिक व पेशेवर योग्यता के बल पर धनोपार्जन करते हैं, ये वस्तुओं का क्रय
विक्रय नहीं करते हैं।  चिकित्सक, अभिभाषक
, सनद लेखपाल , तकनीशियन, अभियंता आदि पेशेवर व्यक्ति की श्रेणी में आते हैं। पेशेवर
व्यक्ति समाज के महत्त्व पूर्ण अंग है। इनके हिसाब किताब को पेशेवर व्यक्तियों के लेखे
कहा जाता है।

प्रश्न 7 - गैर व्यापारिक
संस्थाओं की विशेषताएं क्या है ?
उत्तर - 1. पृथक कानूनी
अभिव्यक्ति,
2. सेवा भावना,
3. कल्याणकारी कार्यों
से कुशलता जांच,
4. कोष स्रोत ,
5. कोषों का पुनर्निवेश
,
6. चुने हुए व्यक्तियों
द्वारा प्रबंध आदि।

प्रश्न 8 - गैर व्यापारिक
संस्थाओं के कोष स्रोत क्या है?
उत्तर - सदस्यों ,सरकार
व अन्य स्रोतों से गैर व्यापारिक संस्थाओं को धन प्राप्त होता है।


प्रश्न 9 - गैर व्यापारिक
संस्थाओं में कोषों का पुनर्निवेश क्या है?
उत्तर - ये संस्थाएं
अपनी आय को पुनः कल्याणकारी कार्यों के लिए ही उपयोग करती है।

प्रश्न 10 - गैर व्यापारिक
संस्थाओं में लेखे रखने की आवश्यकता किन कारणों से होती ?
उत्तर - 1. प्राप्त
कोषों और व्ययों में अंतर के कारण बचत और न्यूनता को ज्ञात करने के लिए,
2. संस्था के प्रतिदिन
की  तरल स्थिति को ज्ञात करने तथा आवश्यक धन
की पूर्ति के लिए और
3. सम्पतियों और दायित्वों
की पूर्ति हेतु कोष की कमी को पूरा करने के लिए सुधारात्मक उपाय आदि के लिए गैर व्यापारिक
संस्थाओं को लेखों की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 11 - व्यापारिक
संस्थाओं और गैर व्यापारिक संस्थाओं में मूल उद्देश्य के आधार पर क्या अंतर है?
उत्तर - व्यापारिक
संस्थाओं का मूल उद्देश्य लाभ कमाना होता है, जबकि गैर व्यापारिक संस्थाओं का मूल उद्देश्य
सेवा और कल्याणकारी कार्य करना होता है।


प्रश्न 12 - स्वामित्व
के आधार पर व्यापारिक संस्थाओं और गैर-व्यापारिक संस्थाओं में क्या अंतर है?
उत्तर - व्यापारिक
संस्थाओं में स्वामित्व पूँजी लगाने वाले व्यक्तियों का होता है, जबकि गैर-व्यापारिक
संस्थाओं में स्वामित्व पूँजी कोष में धन लगाने वाले व्यक्तियों  जो सामान्यतया चंदा देने वाले या दानदाता होते हैं,
का होता है।

प्रश्न 13 - आर्थिक
स्थिति चित्रण के आधार पर व्यापारिक संस्थाओं और गैर-व्यापारिक संस्थाओं में क्या अंतर
है?
उत्तर - व्यापारिक
संस्थाओं में आर्थिक स्थिति चित्रण के लिए व्यापार खाता, लाभ हानि खाता व चिट्ठा बनाया
जाता है, जबकि गैर व्यापारिक संस्थाओं में प्राप्ति भुगतान खाता, आय व्यय खाता व चिट्ठा
बनाया जाता है।

प्रश्न 14 - प्रतिफल
या हानि के आधार पर व्यापारिक और गैर व्यापारिक संस्थाओं में क्या अंतर है?
उत्तर - व्यापारिक
संस्थाओं में प्रतिफल लाभ- हानि के रूप में होता है, जबकि गैर व्यापारिक संस्थाओं में
प्रतिफल बचत और न्यूनता के नाम से जाना जाता है।


प्रश्न 15 - आधिक्य
कोष के आधार पर व्यापारिक और गैर-व्यापारिक संस्थाओं में क्या अंतर है?
उत्तर - व्यापारिक
संस्थाओं में आय का व्यय पर आधिक्य सदस्यों में वितरित होता है, जबकि गैर व्यापारिक
संस्थाओं में यह राशि संस्था की कल्याणकारी योजनाओं में खर्च होती है।

प्रश्न 16 - कोष प्राप्ति
के आधार पर व्यापारिक संस्थाओं में और गैर व्यापारिक संस्थाओं में क्या अंतर है?
उत्तर - व्यापारिक
संस्थाओं में कोष प्राप्ति स्वामियों द्वारा लगाई गई पूँजी से होती है, जबकि गैर व्यापारिक
संस्थाओं में कोष प्राप्ति सदस्यों व बाहरी व्यक्तियों द्वारा दिए गए चंदे, फीस, शुल्क,
दान आदि से होती है।


प्रश्न 17 - गैर व्यापारिक
संस्थाओं द्वारा प्रयुक्त की जाने वाली पुस्तकें कौनसी है?
उत्तर - 1. रोकड़ बही
,
2. स्टॉक रजिस्टर और
3. सदस्यता रजिस्टर
गैर व्यापारिक संस्थाओं में रखी जाने वाली पुस्तकें  हैं।

प्रश्न 18 - गैर व्यापारिक
संस्थाओं में मूल पुस्तक कौन सी है?
उत्तर - गैर व्यपारिक
संस्थाओं द्वारा अपने हिसाब किताब रखने की मूल व महत्वपूर्ण पुस्तक 'रोकड़ बही ' है।
जिससे ये संस्थाएं अपने प्रतिदिन के रोकड़ व्यवहारों का लेखा करती है।  अपनी तरल स्थिति का निरूपण करती है। गैर व्यापरिक
संस्थाओं की रोकड़ बही का प्रारूप व्यापारिक संस्थाओं की रोकड़ बही से भिन्न होता है।


प्रश्न 19 - गैर व्यापारिक
संस्थाओं में स्टॉक रजिस्टर क्या है?
उत्तर - इन संस्थाओं
द्वारा अपनी भौतिक सम्पतियों एवं दीर्घ कालिक उपयोगी सामग्री को एक रजिस्टर में दिखाया
जाता है जिसमें इन वस्तुओं की क्रय तिथि, मात्रा , विशिष्ट सूचना, मूल्य  व दर लिखी होती है। यदि ऐसी वस्तुएं कम है तो एक
ही रजिस्टर रखा जाता है तथा यदि बहुत अधिक वस्तुएं हो तो प्रत्येक प्रकार की सामग्री
का पृथक - पृथक रखा जाता है जैसे खेलकूद सामग्री, फर्नीचर, पुस्तके, यंत्र और औजार
आदि के लिए पृथक पृथक रजिस्टर रखने से सत्यापन में सुगमता होती है।

प्रश्न 20 - गैर व्यापारिक
संस्थाओं में सदस्यता रजिस्टर क्या है?
उत्तर - इन संस्थाओं
के नियमित सदस्य होते हैं , इन सदस्यों का लेखा एक पृथक रजिस्टर में रखा जाता है, जिसमें
सदस्यों के सम्बन्ध में पूर्ण जानकारी यथा नाम , पता , टेलीफ़ोन नम्बर , मेल आई डी,
सदस्यता शुल्क आदि की विगत लिखी जाती है। इसी में सदस्यों के पृथक होने की सूचना आदि
का उल्लेख भी रहता है।  वार्षिक सदस्यता और
चंदे की सूचना भी अंकित रहती है।


प्रश्न 21 - गैर व्यापारिक
संस्थाओं के वित्तीय विवरण क्या है?
उत्तर - इन संस्थाओं
के लिए लाभ कमाने की पूर्ती हेतु की जाने वाली आर्थिक व अन्य क्रियाओं का लेखा-जोखा
रखना जरुरी होता है। ये संस्थाएं अपने आकार के आधार पर इकहरी या दोहरी प्रविष्टि प्रणाली
अपना सकती है। इन के द्वारा तीन तरह के विवरण पत्र तैयार बनाए जाते हैं।
1.  प्राप्ति एवं भुगतान खाता,
2. आय व्यय खाता और
3. चिट्ठा है।

प्रश्न 22 - गैर व्यापारिक
संस्थाओं में लेखांकन की विशिष्ट मदें कौनसी है?
उत्तर - 1. पूर्णतया
आयगत प्रकृति की मदें,
2. पूर्णतया पूंजीगत
प्रकृति की मदें ,
3. परिस्थितियों के
अनुसार निर्धारित पूंजीगत / आयगत मदें मानी जा सकती है और
4. प्रारंभिक पूँजी
कोष ज्ञात करना, इन चार भागों में बांटी जाती है।


प्रश्न 23 - पूर्णतया
आयगत मदें कौन सी है?
उत्तर - 1. चंदा,
2. उपभोग योग्य वस्तुएं,
3. उपभोग योग्य सामग्री
से प्राप्ति,
4. समाचार पत्र पत्रिकाओं
का क्रय विक्रय ,
5. अवशेष सामग्री की
बिक्री से प्राप्त राशि।
6. पुरानी खेल सामग्री
का विक्रय ,
7. मानदेय ,
8. स्थायी सम्पतियों
के क्रय विक्रय से लाभ / हानि,
9. अन्य आयगत आय व
व्यय आदि पूर्णतया आयगति प्रकृति की मदें है।

प्रश्न 24 - गैर व्यापारिक
संस्थाओं में चंदा क्या है?
उत्तर - चंदा एक सदस्यता
शुल्क है, जिसका भुगतान सदस्य द्वारा वार्षिक आधार पर किया जाता है।  इस प्रकार की संस्थाओं में यह आय का मुख्य स्रोत
है। चंदा प्राप्ति एवं भुगतान खाते में प्राप्ति के रूप में तथा आय व्यय खाते में आय
के रूप में दर्शाया जाता है।


प्रश्न 25 - चंदे का
लेखांकन गैर व्यापारिक संस्थाओं में किस प्रकार किया जाता है?
उत्तर - लेखांकन अवधारणा
के अनुसार चालू वर्ष में उसी वर्ष की आय का लेखा किया जाता है। चालू वर्ष का बकाया
चन्दा, पिछले वर्ष के अंत में प्राप्त अग्रिम चंदा जो चालू वर्ष से सम्बंधित है, को
आय व्यय खाते में जोड़ा जाता है तथा पिछले वर्ष का बकाया चंदा जो इस वर्ष प्राप्त हुआ
है , इस वर्ष प्राप्त हुआ आगामी वर्ष का अग्रिम चंदा आय व्यय खाते में घटाया जाता है।

प्रश्न 26 - उपभोग
योग्य वस्तुएं क्या है?
उत्तर - उपभोग योग्य
वस्तुओं का उपभोक्ता द्वारा क्रय कर उपयोग और उपभोग किया जाता है। जैसे गेंहू , आटा,
नमक , चीनी , फल एवं स्थायी उपभोग योग्य वस्तुएं टेलीविजन , साइकिल , रेफ्रिजरेटर
, टोस्टर, मिक्शर, फर्नीचर आदि  तथा सेवाएं
जैसे बिजली, टेलीफोन , परिवहन सेवाएं आदि उपभोग की वस्तुएं है।


प्रश्न 27 - गैर व्यापारिक
संस्थाओं में उपभोग योग्य सामग्री से प्राप्ति क्या है?
उत्तर - कई बार  इन संस्थाओं को उपभोग योग्य सामग्री से कुछ राशि
प्राप्त होती है जिसे आयगत प्राप्ति मानकर आय व्यय खाते के जमा पक्ष में दिखाया जाता
है।

प्रश्न 28 - गैर व्यापारिक
संस्थाओं में अवशेष सामग्री की बिक्री से प्राप्त राशि क्या है?
उत्तर -  इन संस्थाओं के पास उपभोग के बाद बची अवशेष सामग्री
के विक्रय से प्राप्त राशि आयगत मानते हुए आय व्यय खाते के जमा पक्ष में दिखाई जाती
है। जैसे पुराणी पैकिंग सामग्री, बोतल , घास आदि का विक्रय।


प्रश्न 29 - समाचार
पत्र पत्रिकाओं का विक्रय गैर व्यापारिक संस्थाओं के लिए क्या है ?
उत्तर - इन की क्रय
राशि को आयगत व्यय मानते हुए आय व्यय खाते के 
नामे पक्ष में दिखाते हैं तथा पुराने अखबार व पत्रिकाओं की बिक्री से प्राप्त
राशि को आयगत आय मानते हुए आय व्यय खाते के जमा पक्ष में दिखाते हैं।

प्रश्न 30 - गैर व्यापारिक
संस्थाओं के लिए पुरानी खेल सामग्री क्या है।
उत्तर - मनोरंजन क्लब,
खेलकूद क्लब द्वारा पुरानी खेल सामग्री के विक्रय से प्राप्त राशि को आयगत आय मानते
हुए आय व्यय खाते के जमा पक्ष में दिखाया जाता है।


प्रश्न 31 - गैर व्यापारिक
संस्थाओं में मानदेय क्या है ?
उत्तर - ऐसी संस्थाओं
में नियमित कार्यों के अतिरिक्त विशिष्ट कार्य करने हेतु विभिन्न बाहरी व्यक्तियों
को बुलाया जाता है इन्हे किए गए अतिरिक्त भुगतान को आयगत क्रय मानते हुए आय व्यय खाते
के नामे पक्ष में दिखाया जाता है।

प्रश्न 32 - गैर व्यापरिक
संस्थाओं में स्थायी सम्पति के क्रय विक्रय से लाभ हानि क्या है ?
उत्तर - इन संस्थाओं
के पास उपलब्ध स्थाई  सम्पतियों के विक्रय से
प्राप्त अंतर की राशि जो पुस्तक मूल्य से अधिक है तो अधिक राशि आयगत आय मानी जाती है
, यदि विक्रय राशि पुस्तक मूल्य से कम है तो अंतर की राशि आयगत व्यय मानी जाती है।  ये राशियां आय व्यय खाते में दिखाई जाती है।

प्रश्न 33 - गैर व्यापारिक
संस्थाओं अन्य आयगत आय एवं व्यय क्या है?
उत्तर - इन संस्थाओं
में विभिन्न प्राप्तियां जो उस वर्ष से सम्बंधित है जैसे -ब्याज एवं लाभांश से प्राप्त
राशि, मनोरंजन से प्राप्त राशि , टिकट विक्रय से प्राप्तियां आय व्यय खाते के जमा पक्ष
में दिखाई जाती है, जबकि उस वर्ष से सम्बंधित सामान्य व्यय जैसे टेलीफोन बिल, मजदूरी,
बिजली बिल, बीमा व्यय, कार्यालय व्यय, वेतन, मूल्य ह्रास स्टेशनरी आदि व्यय आय व्यय
खाते के नामे पक्ष में दिखाए जाते हैं। प्राप्ति एवं भुगतान खाते में सम्बंधित वर्ष
में प्राप्त सभी राशियां प्राप्तियों में तथा सभी व्यय भुगतान पक्ष में दिखाते हैं।
धन्यवाद!






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